मृदा : परिभाषा एवं संगठन Soil

मृदा अवयवों का वर्णन

          खनिज पदार्थ (Mineral matter) :- मृदा का यह अकार्बनिक अवयव है | जो चट्टानों के अपक्षय से प्राप्त होते है | इसमें आंशिक रूप से पूर्ण अपक्षयित पदार्थ जैसे सवतंत्र सिलिका, एम्ल्युमिनोसिलिकेटस और विभिन्न लवण मूल चट्टान के कण अभ्रक आदि होते है |खनिज विभिन्न आकार के कणों के रूप में पाए जाते है | मृदा में कंकड़, पत्थर, मोटी बालू, महीन बालूसिल्ट तथा क्ले कण पाए जाते है | मृदा के खनिज पदार्थो में 90% मात्र सिलिक, एल्युमिनियम, आयरन व् ऑक्सीजन होते है | शेष 10% में कैल्सियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, सोडियम तथा टाइटेनियम अधिक और नाइट्रोजन, सल्फ़र, फास्फोरस, बोरोन, मैगनीज, जिंक, व कॉपर कम मात्रा मे  होते है | इनके अलावा अन्य तत्व बहुत कम मात्र में होते है |

        जीवांश पदार्थ (Organic Matter) :- भारात्मक दृष्टि से परिदा की उपरी सतह में जीवांश की मात्रा 3 से 5     प्रतिशत होती है |

       मृदाजल (Soil Water) :- पौधो की वृधि के लिए जल मृदा में उपस्थित अनेको लवणों को एक स्थान से दुसरे स्थान तक विलय करके ले जाने का कार्य करता है | मृदा विलियन में घुले लवण अनेक पौधो की वृद्धि के लिए आवश्यक होते है | इनका संाद्र्ण, वर्षा, वाष्पीकरण एव पौधो की दैहिक क्रियाओं से घटता बढ़ता रहता है | मृदा में जल रंध्रावकाश में विभिन्न बलों की सहायता रुका रहता हैं | जब जल वाष्पीकरण व पौधो द्वारा वाष्पोत्सर्जन से उड़ा दिया जाता है, तो रंध्रावकाश में वायु प्रवेश कर जाती है | इस प्रकार वायु व जल की मात्र में परिवर्तन होता रहता है |

        मृदा वायु (Soil Air) :- मृदा में रंध्रावकाश में वायु भरी रहती है | वायु उसी रंध्रावकाश में रहती है जिसमे जल     नहीं होता है | मृदा वायु में बाहरी वायु की अपेक्षा अधिक कार्बन-डाइ-ऑक्साइड रहती है | जैसे जैसे गहराइ में जाते     है तो मृदा वायु में कार्बन-डाइ-ऑक्साइड अधिक होती रहती है और ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन कम होती जाती     है |

 

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